रोग क्यो ?- Why disease
स्वस्थता के बारे मे जानने के बाद भी , हम चाहते हुए भी, हम स्वस्थ क्यो नहीं होते ? इसी लिए उन सभी कारणो को जानना जरूरी है जो हमे रोगी बनाने मे सहायक है । रोग होने के अनेक कारण होते है । जैसे पूर्व जन्म के संचित कर्मो का उदय, वंशानुगत रोग, आकस्मित दुर्घटनाए, आसपास का बाह्य प्रदूषित वातावरण, मौसम का परिवर्तन ओर उसके विपरीत आचरण, पारिवारिक जिम्मेदारियाँ, सामाजिक कुरीतियो का पालन, स्वास्थय विरोधी सरकारी नीतिया, कानून,सुविधाएँ, प्रोत्साहन, स्वास्थ को बिगाड़ने वाले रूढ़िवादी धार्मिक अनुष्ठानों का पालन, जीवन निर्वाह हेतु स्वास्थ्य विरोधी व्यावसायिक वातावरण, आर्थिक मुशकेली, अपव्यय, बदनामी, प्राकृतिक अपदाओका प्रकोप, असंयम, दुर्व्यसोनो का सेवन, मिलावट एवम रसायनिक खाध ओर कीटनाशक दवाए से प्रभावित उपलब्ध आहार सामग्री, संक्रामक रोगो मे प्रारम्भ मे रखी गई उपेक्षावृति, अनावश्यक दवाए का सेवन, प्राण ऊर्जा का अपवय, आराम, निंद्रा, विश्राम का अभाव, क्षमता से ज्यादा काम करना, मल-मूत्र को रोकना, अति भोजन, अति निंद्रा, शरीर मे रोग प्रतिकारक शक्ति का क्षीण होना, गलत अथवा अधूरे इलाज तथा दवाओ का दुष्प्रभाव, वृद्धावस्था के कारण इंद्रियो का शिथिल हो जाना, प्रमाद, आलस्य, अविवेक, अशुभ चिंतन, आवेग, अज्ञान, असजगता, हिंसक, मायावी, अनैतिक जीवन शैली, जिससे सदेव तनावग्रस्त ओर भयभीत रहने की परिस्थितिया बनना आदि रोग के मुख्य कारण होते है ।
needs to life
needs to life
कुश कारण तो हमारे नियंत्रण मे होते है कुश कारण नहीं। फिर भी हमारी आत्मा मे अनंत शक्ति होने से यदि सजगता ओर स्वविवेक पूर्ण जीवन शैली अपनायी जाए तो,जो रोग के कारण हमारे नियंत्रण मे नहीं है, उनके प्रभाव को भी कम किया जा सकता है । जीवन मे सभी को सदैव सभी प्रकार की अनुकूलता नहीं मिलती । प्रतिकूल परिस्थितियो को स्वस्थ चिंतन, मनन ओर सम्यक आचरण द्वारा अपने अनुकूल बनाया जा सकता है, यही स्वास्थ्य का मूल सिद्धान्त ओर स्वस्थ जीवन की आधारशिला होती है । हमारा चिंतन ओर आचरण जितना जितना सम्यक होगा, उतने उतने हम स्वस्थ होते जायेंगे ।
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स्वयं सजगता स्वास्थ्य के लिए -self awareness for health

