SELF AWARENESS FOR HEALTH-
स्वयं सजगता स्वास्थ्य के लिए
स्वयं सजगता स्वास्थ्य के लिए
एक व्यक्ति ने अपने पड़ौसी से कहा, आप मेरे घर की शूरक्षा का ख्याल रखना । पड़ौसी ने उसको पूछा – आप अपने मकान की शूरक्षा का भार हम पर क्यू डाल रहे हों ? क्या आप घर से कही बाहर जा रहे हों ? व्यक्ति ने कहा – नहीं ओर सहजता से जवाब दिया “ मे घर मे ही आराम कर रहा हु , मेरी निंद्रा मे बाधा उत्पन ना हों , इसी कारण आपके सहयोग की अपेक्षा हे ।“ क्या एसे व्यक्ति की बात पड़ौसी हमेशा स्वीकार करेंगे ? क्या एसे व्यक्ति को हम असजग,आलसी अथवा निष्क्रिय तो नहीं कहते । अपने स्वास्थ के बारे मे ज्यादा तर लोगो की स्थिति एसी ही हे ।
आज के समय मे लोग health check-up के समय, treatment ओर उसके side effect के बारे मे जरा सा भी चोस ते नहीं है । रोग का कारण जाने बिना treatment चालू कर देते है । आज एक treatment कल दूसरा treatment ,आज ए doctor कल दूसरा doctor परसो अन्य doctor ,आज ए hospital कभी दूसरा hospital ,आज एक treatment process थोड़े दिन बाद दूसरी treatment process ,ओर रोग मुक्त न होने पर बहुत ज्यादा treatment बदल मे थोड़ा सा भी संकोस नहीं होता । स्वयं की असजगता ,अविवेक ओर सही चिंतन न होने पर हमारी सोच लुभावने विज्ञापनो , doctor के पास पड़ने वाली भीड़ से प्रभावित होती है। हम निराश होकर doctor की प्रयोगशाला बन मे थोड़ा सा भी विचार नहीं कर ते । आज अधिंकाश असाध्य ओर संक्रामक रोगो का एक मुख्य कारण , starting level मे ही गलत treatment से होने वाले side effect होते है । जिसकी तरफ सायद किसी का ध्यान जा रहा है ।
क्या हमारा श्वास अन्य व्यक्ति ले सकता हे ? क्या हमारा खाया हुआ अन्य कोई पचा सकता हे ? क्या दूसरो के से खाने ओर पीने से हमारी भूख ओर प्यास मीट सकती हे ? दूसर के आंखो से हम देख नहीं सकते , दूसरे के कान से हम सुन नहीं सकते , दूसरो के पैरो से चल नहीं सकते । अपने स्वयं की गतिविधियो के संचालन, नियंत्रण से जीतने हम परिचित होते हे, उतना दूसरा कोई नहीं होता । हम क्यो तनाव-ग्रस्त,चिंतित,निराश भयभीत हे ? उनका सही विश्लेषण दूसरा व्यक्ति या यंत्र नहीं कर सकता । हम स्वयं अपने खान–पीने, रहन-सहन, आसार-विचार ओर गलत जीवन चर्या के अप्राकृतिक तरीको से रोगो को आमंत्रित कर ते हे, पर दवा ओर डॉक्टर से पूर्ण स्वस्थय की आशा रखते हे । कितना भ्रम है ? डॉक्टर ओर दवा मात्र सहयोग की भूमिका निभा सकते है । स्वस्थय को बनाए रखने मे स्वयं की सजगता जरूरी हे । मानसिक असंतुलन ओर रोग का आभास होने पर रोगिकों पिसले एक-दो दिन की गतिविधियो की समीक्षा करनी सहीए । हमे अपने आप अपनी गलती का पता लग जाएगा, जिसके कारण रोग हुआ हे । रोग की प्रारंभिक स्थिति मे ही जो संकेत मिलते हे उनकी समीक्षा करे ,ओर हवा ,पानी ओर भोजन लेने मे जो गलती हुई हे उनको सुधारे । कारण मालूम पड़ने पर उपाय ढूँढना आसान हो जाएगा । स्वस्थ रहेकी ईशा रखने वाले कों हर रोज खुदकी समीक्षा करनी चाहिए ।
All diseases are curable but not all patients because they are very much impatience
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