Relation of soul and body for health -आत्मा और शरीर का संबंध स्वास्थ्य के लिए
Relation of soul and body for health
जैसा बताया गया है कि आत्मा (soul)और शरीर(body) अलग-अलग(different) है। जब तक दोनों साथ में होते हैं, तभी तक स्वास्थ्य(health) की समस्या (problem) होती है। दोनों के अलग होते ही शरीर की सारी गतिविधियाँ ( activities) स्वत: (self) समाप्त (finished) हो जाती हैं। शरीर की समस्त (all) गतिविधियों के संचालन (operation)करने वाली चेतना (प्राण) (Consciousness) और प्राण ऊर्झा (vitality energy) भी दोनों से अलग होती है, जिसका निर्माण(Construction) आत्मा(soul) और शरीर(body) के सहयोग(help) से होता है। बिना (without) आत्मा (soul) अथवा शरीर (body) प्राण ऊर्जा का अस्तित्व (existence) नहीं होता। प्राण और प्राण ऊर्जा को भी प्राय(Usually)जनसाधारण(Masses) एक ही समझते(Understand) हैं, परन्तु दोनों अलग-अलग ( different) होते है । ऊर्जा तो जड़ (root) है, जबकि प्राण में चेतना होती है। गुब्बारे में हवा (air) भरने (Filling) से उसमें प्राण नहीं आ जाते और न हवा निकालने से गुब्बारे के प्राण चले जाते हैं। ऊर्जा शरीर में बाहर (out side) से भीतर (inside) आती है या शरीर में श्वसन की प्रक्रिया (process) से बनती है। जबकि प्राण शरीर में जन्म से विद्यमान होता है। प्राण अपने आप में शाश्वत (Perpetual) होता है, जबकि प्राण ऊर्जा को श्वास का आलम्बन (Dedication)आवश्यक(Required) होता है। इस लिए प्राण कहें या चेतना (Consciousness), शरीर में आत्मा (soul) के ही अंश (part) होते हैं तथा आत्मा शरीर में जिस शक्ति (power) से निश्चित (Fixed) आयुष्य (Life span) तक ठहरी (stay) हुई रहती है, उस शक्ति को प्राण ऊर्जा कहा जा सकता है। उदाहरण (example) के लिए जैसे कोई व्यक्ति मोटर कार चला रहा है तो कार की तुलना (Comparison) तो शरीर से की जा सकती है और जो पेट्रोल के रूप में ईंघन (fuel) रूपी ऊर्जा इंजिन (engine) को बराबर मिलती रहती है उसकी तुलना प्राण ऊर्जा से | जो कार चालक (driver) है, उसकी तुलना आत्मा से की जा सकती है । मतलब बिना चालक और पेट्रोल के कार नहीं चल सकती । वेसेही उसी प्रकार बिना प्राण और प्राण ऊर्जा के जीवन(life) रूपी गाड़ी नहीं चल सकती । जिसमें प्राण होता है, वही प्राणवान होता है । जब किसी की मृत्यु हो जाती है तो, वेसे ही हम यही कहते हैं कि व्यक्ति के प्राण निकल गये । यह नहीं कहते कि प्राण ऊर्जा निकल गई । प्राण की उपस्थिति में ही जीव प्राणी कहलाता है। प्राण हमारी आत्मा और स्थूल शरीर के बीच (between) सेतु (Bridge) का कार्य (work) करता है। आत्मा और शरीर का सारा संबंध(relation) प्राण के द्वारा(through) ही होता हैं।

